दारोगा भर्ती 2016: रिक्त पदों पर अतिरिक्त परिणाम जारी करने की मांग हाई कोर्ट से खारिज

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने 2016 की दारोगा भर्ती में रिक्त पदों पर अतिरिक्त परिणाम की मांग खारिज कर दी । कोर्ट ने कहा कि भर्ती नियमों में वेटिंग लिस्ट का प्रविधान नहीं और नई भर्ती प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी है।

दारोगा भर्ती 2016: रिक्त पदों पर अतिरिक्त परिणाम जारी करने की मांग हाई कोर्ट से खारिज

राज्य सरकार को राहत देते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने वर्ष 2016 की दारोगा भर्ती में रिक्त रह गए पदों के सापेक्ष अतिरिक्त परिणाम घोषित करने की मांग खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि संबंधित भर्ती नियमों में वेटिंग लिस्ट का कोई प्रविधान नहीं है। गैर चयनित अभ्यर्थियों का रिक्त पदों पर कोई निहित अधिकार नहीं बनता। साथ ही 2025 की नई भर्ती प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी है, इसलिए पुरानी भर्ती के अभ्यर्थियों को लाभ देने के लिए मौजूदा भर्ती प्रक्रिया को पीछे नहीं ले जाया जा सकता।

यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की पीठ ने प्रांशु कुमार सिंह व 17 अन्य, विष्णु स्वरूप सिंह व 31 अन्य तथा अश्वनी कुमार पांडेय व एक अन्य की ओर से दाखिल तीन विशेष अपीलों को खारिज करते हुए दिया। मामला 17 जून 2016 को जारी विज्ञापन के तहत सब इंस्पेक्टर (सिविल पुलिस), प्लाटून कमांडर (पीएसी) और फायर सर्विस सेकंड आफिसर के पदों पर हुई भर्ती से जुड़ा था।
याचियों ने भर्ती में रिक्त रह गए पदों के सापेक्ष अतिरिक्त चयन परिणाम जारी करने की मांग की थी। एकल पीठ ने पहले ही उनकी याचिकाएं खारिज कर दी थीं। कोर्ट ने कहा था कि याची चयनित अभ्यर्थियों की सूची में नहीं थे, बल्कि गैर चयनित अभ्यर्थियों की सूची में शामिल थे। भर्ती नियमों में प्रतीक्षा सूची का प्रविधान नहीं होने के कारण रिक्त पदों पर उनका कोई कानूनी अधिकार नहीं बनता।

एकल पीठ के आदेश के खिलाफ दाखिल विशेष अपीलों में अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट के स्टेट आफ यूपी बनाम अतुल कुमार द्विवेदी मामले में सात जनवरी 2022 के फैसले का हवाला दिया। इसमें सामान्यीकरण की प्रक्रिया को बरकरार रखते हुए बाद में अयोग्य घोषित कुछ अभ्यर्थियों को अगली भर्ती में वेटेज या आयु में छूट देने पर राज्य को विचार करने को कहा गया था।

पीठ ने इस तर्क से असहमति जताई। कहा कि यदि अभ्यर्थी इस निर्देश का लाभ लेना चाहते थे तो 2025 की भर्ती का विज्ञापन जारी होने के समय ही अदालत का रुख करना चाहिए था। अब 2025 की भर्ती प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी है। ऐसे में उसमें हस्तक्षेप कर उसे पीछे ले जाना उचित नहीं होगा। पीठ ने कहा कि एकल पीठ के आदेश में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है। तीनों विशेष अपीलों में दम नहीं होने के कारण उन्हें खारिज कर दिया गया।

पेंशन आदेश की अवहेलना पर अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार को अवमानना नोटिस
सेवानिवृत्त डाक्टरों की संशोधित पेंशन के मामले में हाई कोर्ट के आदेश का समय से अनुपालन नहीं किए जाने पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी किया है।

कोर्ट ने उन्हें यह स्पष्ट करने को कहा है कि आदेश की जानबूझकर अवहेलना के लिए उनके खिलाफ अवमानना अधिनियम, 1971 के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए। मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर को होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया ने डा.बृजेंद्र पाल आजाद श्रीवास्तव समेत सात याचियों की अवमानना याचिका पर दिया।

लिस्टिंग व स्थगन केसों में निश्चित तारीख तय करने पर हाई कोर्ट ने मांगे सुझाव
मुकदमों की लिस्टिंग, स्थगन और ‘स्टैंड आउट’ मामलों की सुनवाई में निश्चित तारीख तय करने की व्यवस्था में सुधार की मांग पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने याची अधिवक्ताओं को अपने सुझाव प्रशासनिक पक्ष के समक्ष रखने को कहा है।

कोर्ट ने कहा कि सुझावों पर प्रशासनिक स्तर पर विचार किया जा सकता है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजिव शुक्ल की पीठ ने गिरधारीलाल यादव व अन्य अधिवक्ताओं की ओर से दाखिल जनहित याचिका का निस्तारण करते हुए दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक स्तर पर इन सुझावों पर विचार किया जा सकता है।